Latest News

डॉक्टरों का खुलासा, अब गर्भधारण के दौरान मां को नहीं होगी डायबिटीज

Yamini Saini

जैसे जैसे गर्भकाल बढ़ता है तो उसे डायबिटीज रोग हो जाता है. इससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी जस्टेसनल डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है  

जयपुर: डायबिटीज पर चर्चा करने के लिए देश-विदेश के डॉक्टर जयपुर में जुटे जहां इस बीमारी से से जुड़े कई पहलुओं पर मंथन किया गया. डायबिटीज के तमाम पहलुओं पर जुड़े तथ्यों पर चर्चा करने के बाद यह बात सामने निकर कर आई कि अब शिशु के गर्भस्थ अवस्था में यह बात पता चल जाएगी कि मां को आगे डायबिटीज होगी कि नहीं. कई बार ऐसा होता है कि मां जब गर्भधारण करती है तो वह डायबिटीक नहीं होती, मगर जैसे जैसे गर्भकाल बढ़ता है तो उसे डायबिटीज रोग हो जाता है. इससे गर्भ में पल रहे शिशु को भी जस्टेसनल डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है. ऐसे में कुछ टेस्ट, खानपान सुधारने और कुछ विशेष दवाओं से इस रोग से मां व शिशु को बचाया जा सकता है. 

इसी तरह स्टेम सेल थैरेपी, इंसुलिन पैच जैसे कई डिवाइस आ रहे हैं, जो इस बीमारी के खतरे को कम करेंगे. भारत में अभी 7 करोड़ डायबिटीज के रोगी हैं, जो दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं. यही स्थिति रही तो आने वाले 15-20 साल में यह आंकड़ा दुगना हो जाएगा. रिसर्च सोसायटी फॉर दी स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया के राजस्थान चेप्टर की ओर से जयपुर में टोंक रोड स्थित एक होटल में डायबिटीज पर शनिवार से शुरू हुई दो दिवसीय कांफ्रेंस में देश-विदेश के डॉक्टरों ने इस रोग के नए कारण और निदान, नए शोध आदि पर चर्चा के दौरान इस तरह की जानकारी साझा की है.

मुंबई के डॉ. मनोज चड्ढ़ा ने बताया कि, अगर बच्चे को भविष्य में डायबिटीज के खतरे से बचाना है, तो मां को गर्भधारण की तैयारी करते वक्त अपनी डायबिटीज पर खास ध्यान रखना होगा. वह डायबिटीक नहीं है तो भी गर्भावस्था के दौरान ऐसा भोजन नहीं लेना चाहिए जो इस रोग को बढ़ाता है. आमतौर पर धारणा है कि मां को अपने साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी डबल भोजन लेना चाहिए, मगर यह ठीक नहीं है. 

 

Related News you may like

Article

Side Ad