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मासिक धर्म से जुड़े विषय पर केंद्रित है ऑस्कर जीतने वाली भारतीय फिल्म 'पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस'

Yamini Saini

'पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस' भारत में महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं के खिलाफ और असल जिंदगी के 'पैडमैन' अरुणाचलम मुरुगनाथम के काम पर बात करती है.

 

नई दिल्ली: भारत की लघु फिल्म ‘पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस’ को बेस्ट डॉक्युमेंट्री शॉर्ट सब्जेक्ट का ऑक्सर अवॉर्ड मिला है. बता दें, यह फिल्म पीरियड्स से जुड़ी भ्रांतियों से जूझ रही एक महिला के जीवन पर आधारित है. 'पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस' भारत में महिलाओं के मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं के खिलाफ और असल जिंदगी के 'पैडमैन' अरुणाचलम मुरुगनाथम के काम पर बात करती है.

फिल्म कार्यकारी निर्माता गुनीत मोंगा और इसका सह-निर्माण मोंगा की सिखिया एंटरटेनमेंट कंपनी द्वारा किया गया है जिसने 'द लंचबॉक्स' और 'मसान' जैसी फिल्मों का हिस्सा रह चुकी है. ऑस्कर की घोषणा के एक रात पहले ही मोंगा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट में कहा था कि ऑक्सर में चाहे जो भी हो... टीम 'पीरियड: एंड ऑफ सेंटेंस' पहले से ही विजेता है."

ईरानी-अमेरिकी फिल्म निर्माता रेका जेहाबाची द्वारा निर्देशित फिल्म पैड प्रोजेक्ट द्वारा बनाई गई है. 26 मिनट की फिल्म उत्तरी भारत के हापुड़ की लड़कियों और महिलाओं और उनके गांव में पैड मशीन की स्थापना के ईद-गिर्द घूमती है. फिल्म में मुरुगनाथम की सैनिटरी पैड मशीन के आविष्कार को भी दिखाया गया है. 

जेहताबची ने ऑस्कर पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा, ‘‘मैं इसलिए नहीं रो रही हूं कि मेरा माहवारी चल रहा या कुछ भी. मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि माहवारी को लेकर बनी कोई फिल्म ऑस्कर जीत सकती है.' वहीं बर्टन ने इस पुरस्कार को अपने स्कूल को समर्पित करते हुए कहा कि इस परियोजना का जन्म इसलिए हुआ क्योंकि लॉस एंजिलिस के मेरे विद्यार्थी और भारत के लोग बदलाव लाना चाहते थे. भारत के लिए ऑस्कर का यह क्षण एक दशक के बाद आया है, जब एआर रहमान और साउंड इंजीनियर रसूल पोकुट्टी को ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ के लिए 2009 में अकादमी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. 

 

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