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डायबिटीज मरीजों के पेंक्रियाज की नई कोशिकाओं से ही बनाया जाएगा इंसुलिन

Yamini Saini
  • बेरगेन, नार्वे और जेनेवा विश्वविद्यालयाें की संयुक्त रिसर्च ने किया गया दावा
  • पूरी तरह से बीटा का हटाने या नष्ट करने पर अल्फा कोशिकाएं बनाने लगती हैं इंसुलिन
  • वैज्ञानिकों के मुताबिक, मधुमेह मरीजों के इलाज में यह बड़ा बदलाव साबित होगा

हेल्थ डेस्क. वैज्ञानिकों ने पेन्क्रियाज में ऐसी कोशिकाओं की खोज की है जिनसे इंसुलिन हार्मोन का निर्माण किया जा सकता है। इंसुलिन हार्मोन का काम शरीर में ब्लड शुगर को नियंत्रित करना है। यह शोध चूहों पर किया गया है। रिसर्च के दौरान इंसुलिन बनाने वाली बीटा कोशिकाओं को निकाल दिया गया। कुछ समय के बाद आसपास की अल्फा कोशिकाओं ने इंसुलिन बनाना शुरू कर दिया। वैज्ञानिकों का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए यह नए तरह का इलाज साबित होगा। यह रिसर्च बेरगेन, नार्वे और जेनेवा विश्वविद्यालयाें ने संयुक्त रूप से की है। 

ऐसे किया गया टेस्ट

  1.  शरीर के जिस हिस्से में जहां बीटा कोशिकाएं पाई जाती हैं वहां शोधकर्ताओं ने चूहे में डिप्थीरिया का बैक्टीरिया इंजेक्ट किया। बैक्टीरिया ने 10 दिन के अंदर बीटा कोशिकाओं को खत्म कर दिया। चूहे की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण ट्रांसप्लांट हुई बैक्टीरिया वाली कोशिकाओं को रिजेक्ट नहीं कर सका। चूहों में ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए पेन्क्रियाटिक कोशिकाएं ट्रांसप्लांट की गईं। करीब एक महीने के बाद चूहों में अल्फा कोशिकाएं विकसित होने लगी। इनसे इंसुलिन का निर्माण शुरू हुआ। 

     

  2.  वैज्ञानिकों का मानना है कि बीटा कोशिकाओं के दोबारा बनने और ब्लड शुगर को सामान्य करने के लिए इंसुलिन की इतनी कम मात्रा पर्याप्त है। वैज्ञानिकों ने जब बीटा कोशिकाओं की आधी मात्रा हटाई तो अल्फा कोशिकाओं ने काम करना शुरू नहीं किया। रिसर्च के मुताबिक, जब पूरी तरह बीटा कोशिकाओं को हटाया गया तभी अल्फा कोशिकाओं ने इंसुलिन बनाना शुरू किया। शोधकर्ताओं के अनुसार, कोशिकाओं की पहचान और इनके कार्यों के बदलने की क्षमता दूसरी बीमारियों जैसे अल्जाइमर को भी दूर करने में मददगार साबित होंगी। 

     

  3.  बेरगेन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता लूइजा घिला के मुताबिक, टाइप-1 डायबिटीज की स्थिति तब बनती है जब पेन्क्रियाज में मौजूद बीटा कोशिकाओं इंसुलिन बनाने में पूरी तरह असमर्थ होती हैं वही टाइप-2 की स्थिति में ये कोशिकाएं जरूरत के मुताबिक इंसुलिन नहीं रिलीज कर पाती हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन में 40 लाख और अमेरिका में 4 करोड़ डायबिटीज रोगी हैं। दोनों ही देशों में करीब 90 फीसदी डायबिटीज रोगी टाइप-2 से पीड़ित हैं।

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