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‘मैं तुझे देख लूंगा’ कहना धमकी नहीं : गुजरात हाईकोर्ट

Yamini Saini
  • जज ने कहा- धमकी वह होती है, जिससे दिमाग में डर बैठे
  • पुलिस ने धमकी मामले में वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया

अहमदाबाद.  ‘मैं तुझे देख लूंगा’ कहना धमकी नहीं है। गुजरात हाईकोर्ट ने इस वाक्य को अपराध मानने से इनकार कर दिया।कोर्ट ने कहा कि धमकी वह होती है, जिससे किसी के दिमाग में कोई डर पैदा हो। हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक वकील के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया।

पुलिस ने वकील के खिलाफ किया था केस

  • साबरकांठा के वकील मोहम्मद मोहसिन छालोतिया मई 2017 में लॉकअप में बंद मुवक्किल से मिलने गए थे। पुलिस ने उन्हें मिलने से रोक दिया। बहस होने पर गुस्साए वकील ने पुलिसकर्मियों को देख लेने और हाईकोर्ट में घसीटने की धमकी दी थी। इस पर पुलिस ने वकील के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और ऑफिसर को ड्यूटी से रोकने का मामला दर्ज कर लिया। वकील तभी से जेल में हैं। उन्होंने एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस एएस सुपैया ने फैसले में कहा कि इस केस में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई, जिसे आपराधिक मानें।
  • हाईकोर्ट ने धमकी की व्याख्या भी स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी को धमकी दी जाए, तब पीड़ित को स्पष्ट होना चाहिए कि आरोपी किसी तरह के गैरकानूनी कृत्य से उसे शारीरिक, मानसिक अथवा उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है।

चोट की बात स्पष्ट नहीं होने पर हाईकोर्ट ने रद्द की याचिका 
केस में पुलिस ने आईपीसी की धारा 186, 189 और 506 (1) के तहत शिकायत दर्ज की। आईपीसी 186 जनसेवक के कामकाज में दखल करने के मामले में अपराध की धारा है। आईपीसी 189 जनसेवक को धमकी देने के मामले में लागू होती है। शिकायतकर्ता ने धमकी दी थी कि- ‘मैं तुम सभी को देख लूंगा और हाईकोर्ट जाऊंगा।’ सिर्फ हाईकोर्ट से संपर्क करने की बात कहने से चोट की बात स्पष्ट नहीं होती। धारा 506 में भी पीड़ित को धमकी देने वाले व्यक्ति काे चोट पहुंचाने का इरादा स्पष्ट नहीं हुआ, इसलिए एफआईआर रद्द कर दी गई।

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