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आरोपियों को बचाने के मामले में अल्फाबेट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के खिलाफ कोर्ट केस

Yamini Saini
  • कंपनी के दो शेयरधारकों ने मुकदमा किया, नीतियों में बदलाव की मांग
  • गूगल में पिछले साल यौन उत्पीड़न के मामलों का खुलासा हुआ, अल्फाबेट गूगल की पेरेंट कंपनी
  • गूगल पर आरोप- उसने मामला दबाया, एग्जिट प्लान के तहत एक आरोपी को 660 करोड़ रु भी दिए

सैन फ्रांसिस्को. गूगल कंपनी में यौन उत्पीड़न के आरोपियों को बचाने के मामले में अल्फाबेट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के खिलाफ कंपनी के दो शेयरधारकों ने कोर्ट केस कर दिया है। अल्फाबेट गूगल की पेरेंट कंपनी है।

 
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि गूगल को भविष्य में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए अपने तौर-तरीके बदलने चाहिए। उनका कहना है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में अल्फाबेट के डायरेक्टर अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा पाए। उन्हें कंपनी को हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।

बोर्ड मीटिंग में यौन उत्पीड़न मामले पर चर्चा हुई थी: याचिकाकर्ता

  1.  अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने पिछले साल अक्टूबर में दावा किया था कि गूगल के एंड्रॉयड मोबाइल ऑपरेटिंग डिवीजन के हेड रहे एंडी रूबीन पर साल 2013 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। इसके बावजूद गूगल ने एंडी को बचाया और साल 2014 में एग्जिट प्लान के तहत उन्हें 9 करोड़ डॉलर (660 करोड़ रुपए) भी दिए। साल 2016 तक गूगल की सर्च यूनिट के हेड रहे अमित सिंघल पर भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

     

  2.  अल्फाबेट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के खिलाफ दायर एक याचिका में कंपनी की बोर्ड मीटिंग के मिनट्स का हवाला देते हुए कहा गया है कि एक बैठक में यौन उत्पीड़न के आरोपियों के बारे में चर्चा हुई थी।

  3. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि अल्फाबेट के बोर्ड में कम से कम 3 स्वतंत्र निदेशक रखे जाने चाहिए और प्रबंधन के फैसलों पर शेयरधारकों को नजर रखने का अधिकार मिलना चाहिए।

     

    गूगल के सीईओ ने माफी मांगी थी

     

    4. गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने पिछले साल कर्मचारियों से माफी भी मांगी थी। उन्होंने यौन उत्पीड़न के मामलों को हैंडल करने के कंपनी तौर-तरीकों पर अफसोस जताते हुए भविष्य में सुधार की बात कही थी।

     

    गूगल के 20,000 कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था

     

    5. पिछले साल नवंबर में गूगल के करीब 20 हजार कर्मचारियों ने दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन किया था। इनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं। इनकी मांग थी कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पारदर्शी नीति बनाई जाए। मध्यस्थता की अनिवार्यता खत्म की जाए।

     

    कर्मचारियों के विरोध के बाद गूगल ने नवंबर में ही पॉलिसी में बदलाव कर दिया। नए नियमों के मुताबिक कंपनी की मध्यस्थता जरूरी नहीं होगी बल्कि यह पीड़ित की इच्छा पर निर्भर करेगा। यानी पीड़ित कर्मचारी चाहें तो सीधे कोर्ट जा सकते हैं।

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