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प्रियंका गांधी की एंट्री से बसपा बदल रही रणनीति

Yamini Saini

बसपा सूत्रों के मुताबिक प्रियंका की एंट्री के बाद अब जहां बसपा सुप्रीमो मायावती के चुनाव मैदान में उतरने की संभावना नहीं है, वहीं मुस्लिम वोटरों के रुख को देखते हुए लोकसभा सीटों व टिकटों को लेकर नए सिरे से मंथन भी किया जा रहा है.

 

लोकसभा चुनाव के लिए यूपी के सियासी रण में पल-पल रणनीति बदलती नजर आ रही है. सपा-बसपा गठबंधन से हाशिए पर ढकेले जाने के बाद कांग्रेस ने प्रियंका कार्ड का दांव चल सबको चौंका दिया. प्रियंका के आने से गठबंधन और बीजेपी दोनों को ही अपनी रणनीति में बदलाव करने को मजबूर कर दिया है. खासकर बसपा अपनी रणनीति पर नए सिरे से मंथन कर रही है. अब तक जहां मायावती चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही थीं, अब वह अपना इरादा बदल सकती है.

बसपा सूत्रों के मुताबिक प्रियंका की एंट्री के बाद अब जहां बसपा सुप्रीमो मायावती के चुनाव मैदान में उतरने की संभावना नहीं है, वहीं मुस्लिम वोटरों के रुख को देखते हुए लोकसभा सीटों व टिकटों को लेकर नए सिरे से मंथन भी किया जा रहा है.

दरअसल, बसपा सुप्रीमो मायावती के बिजनौर के नगीना सीट से चुनाव लड़ने की बात कही जा रही थी, लेकिन अब यहां से गिरीश चंद्र जाटव के चुनाव लड़ने की बात सामने आ रही है. यह भी कहा जा रहा था कि मायावती अम्बेडकरनगर से भी चुनाव लड़ सकती हैं. लेकिन अब यहां से रमेश पांडेय को टिकट मिलना तय माना जा रहा है.

गठबंधन के ऐलान के बाद बसपा ने करीब दो दर्जन प्रभारियों के नामों का ऐलान कर दिया है. बसपा प्रभारी ही प्रत्याशी होते हैं लिहाजा इन सभी का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा था. अब नई रणनीति के मुताबिक इनमें भी कुछ बदलाव हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक पहले हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की संभावनाओं को देखते हुए बसपा मुस्लिम प्रत्याशियों को ज्यादा टिकट देने के मूड में नहीं थी. लेकिन प्रियंका के आने के बाद मुस्लिमों को तेवर को देखते हुए अब मुसलमानों को ज्यादा भागीदारी देने पर भी मंथन चल रहा है. अब टिकट देने में आर्थिक स्थिति के साथ ही पार्टीके पूर्व सांसद, विधायक और बसपा सरकार में मंत्री रहे नेताओं के नाम पर भी गंभीरता से विचार कर रही हैं.

बता दें 12 जनवरी को गठबंधन का ऐलान हुआ था. सूत्र बताते हैं कि अगर प्रियंका गांधी की एंट्री न हुई होती तो अब तक सपा-बसपा सीटवार बंटवारे का ऐलान कर चुकी होती. लेकिन अब किन सीटों पर कौन लड़ेगा इस पर नए सिरे से विचार हो रहा है.

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