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खून में मिली कीमोथैरेपी ड्रग को छानकर अलग करने के लिए बनाया फिल्टर, तेज हो सकेगी कैंसर से रिकवरी

Yamini Saini
  • कीमोथैरेपी के साइड इफेक्ट रोकने के लिए कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 3डी प्रिंटेड ड्रग स्पंज तैयार किया 
  • डिवाइस की मदद से कैंसर मरीज को हाई डोज देकर इलाज में तेजी लाई जा सकती है

कैंसर मरीज को कीमोथैरेपी के खतरों से बचाने के लिए कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक खास तरह का 3डी प्रिंटेड ड्रग स्पंज तैयार किया है। यह ट्रीटमेंट के दौरान दिए कीमोथैरेपी ड्रग को रक्त से अलग करता है ताकि दवाओं की हाई डोज को पूरे शरीर में सर्कुलेट होने से रोका जा सके। वैज्ञानिकों का कहना है कि डिवाइस की मदद से कैंसर मरीज को हाई डोज देकर इलाज में तेजी लाई जा सकती है।

 
कैसे काम करता है ड्रग स्पंज
  1.   वैज्ञानिकों के मुताबिक, कैंसर को खत्म करने के लिए कीमोथैरेपी के दौरान 100 से अधिक तरह ड्रग दिए जाते हैं जो ब्लड में मिलकर कैंसरस ट्यूमर को खत्म करने का काम करते हैं। लेकिन दवाएं रक्त में मिलकर पूरे शरीर में सर्कुलेट होती हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए ड्रग स्पंज बनाया गया है। जो कीमोथैरेपी के ठीक बाद रक्त में से दवाओं को फिल्टर शुद्ध रक्त बॉडी मेंं रिलीज करता है। वर्तमान में टेस्ट कीमो ड्र्रग डोक्सोरुबिसिन पर किया गया है जिसका इस्तेमाल कई तरह के कैंसर में किया जाता है। 

     

  2.   एक रोल के आकार का 3 मिमी लंबाई का स्पंज पॉली डाईएक्रेलेट से तैयार किया गया है। इसकी अंदरूनी संरचना ऐसी है कि जो सिर्फ ब्लड को फिल्टर करता है और कीमो ड्रग को रोक देता है। शोधकर्ता बेलसरा का कहना है कि यह फिल्टर केमिकल इंजीनियर के कॉन्सेप्ट पर काम करता है। जैसे पेट्रोलियम रिफाइनरी ऑयल से सल्फर को निकाने का काम करती हैं। यह रिसर्च अमेरिकन केमिकल साेसायटी के जर्नल सेंट्रल साइंस में प्रकाशित हो चुकी है।

     

  3.   शोध अभी सुअरों पर किया गया है। लिवर कैंसर से पीड़ित सुअरों के शरीर में कीमोड्रग इंजेक्ट (डोक्सोरुबिसिन ) किया गया। कीमोफिल्टर की मदद से 64 फीसदी ड्रग को ब्लड से अलग किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कीमोथैरेपी के दौरान 100 से अधिक ड्र्रग का इस्तेमाल किया जाता है जो अक्सर शरीर की सामान्य क्रियाओं को प्रभावित करते हैं। करीब 50-80 फीसदी ड्रग कैंसर ट्यूमर तक नहीं पहुंच पाते हैं और रक्त में घुलकर पूरे शरीर में फैलकर नुकसान पहुंचाते हैं। 

     

  4.  वैज्ञानिकों के मुताबिक, डिवाइस की मदद से किस हद तक कीमोथैरेपी के साइड इफेक्ट कम किए जा सकते हैं इस पर काम जारी है। साथ ही धमनियों में रक्त के थक्कों से भी निपटा की कोशिशें जारी हैं। ब्रिटेन में हर साल 6 लाख 50 हजार लोगों को कीमोथैरेपी दी जाती है।

    क्या हैं कीमोथैरेपी के साइडइफेक्ट

     कैंसर की स्थिति में शरीर में मौजूद कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ना शुरू हो जाती हैं। कीमोथैरेपी की मदद से दिया जाने वाला ड्रग इन कोशिकाओं को खत्म करता है। लेकिन इन दवाओं के कारण सामान्य और स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। साइड इफेक्ट के रूप में बालों का झड़ना, संक्रमण, सुनने में दिक्कत होना, सांस लेने में तकलीफ होना, थकान लगना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ मामलों में कीमोथैरेपी के साइडइफेक्ट ट्रीटमेंट के बाद दिखाई देते हैं। 

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