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जींद उपचुनाव: आखिर क्यों सुरजेवाला पर दांव खेल रही है कांग्रेस?

Yamini Saini

सुरजेवाला को 2005 में यातायात एवं संसदीय कार्य मंत्री बनाया गया था. 2014 के चुनावों में कांग्रेस प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही लेकिन रणदीप जीतने में कामयाब रहे.

जींद के लिए जद्दोजहद का अंजाम क्या होगा? ये तो कोई नहीं जानता. लेकिन, उपचुनाव की जंग के लिए कांग्रेस ने अपने दिग्गज नेता रणदीप सुरजेवाला को चुनावी मैदान में उतार दिया है. गुरुवार को पूरे दिन बैठक हुई, मंथन हुआ लेकिन कांग्रेस हाईकमान किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई. हालांकि देर रात कांग्रेस ने सुरजेवाला को जींद उपचुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिया. सुरजेवाला का उपचुनाव में उतरने से दूसरी पार्टियों के लिए सियासी समीकरण बदलते दिखते हैं.

कौन हैं रणदीप सुरजेवाला?

सुरजेवाला कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी हैं. सुरजेवाला हरियाणा के कैथल से विधायक हैं. सुरजेवाला 6 बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुक हैं. उन्होंने 1996 और 2005 चुनावों में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को हराया. हुड्डा सरकार में 2005 से 2014 तक वो मंत्री रहे. सुरजेवाला हरियाणा के सबसे कम आयु के मंत्री रहे हैं.

सुरजेवाला भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले पहले हरियाणवी बने

सुरजेवाला को 2005 में यातायात एवं संसदीय कार्य मंत्री बनाया गया था. 2014 के चुनावों में कांग्रेस प्रदेश में तीसरे स्थान पर रही लेकिन रणदीप जीतने में कामयाब रहे. 17 साल की आयु में हरियाणा प्रदेश युवा कांग्रेस के जनरल सेक्रेट्री बने. सुरजेवाला 1986 में हरियाणा प्रदेश युवा कांग्रेस के सबसे कम आयु के सह-सचिव और फिर सचिव भी बने. मार्च 2000 में भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले पहले हरियाणवी बने.

क्या कांग्रेस के पास नहीं था जिताऊ कैंडिडेट

कुल मिलाकर सियासी खानदान से आने वाले सुरजेवाला ने अपनी कार्य कुशलता से अपना लोहा मनवाया है. लेकिन, सवाल कांग्रेस पर कि आखिर क्यों एक ऐसे प्रत्याशी को मैदान में उतारा गया जो कैथल से विधायक है. ऐसे में अगर जीत मिलती भी है तो उपचुनाव का राग एक बार फिर सियासी फिज़ाओं में गूंजेगा. क्या कांग्रेस के पास कोई और जिताऊ कैंडीडेट नहीं था या फिर कांग्रेस की आपसी कलह को दूर करने के लिए हाईकमान के पास इससे बेहतर विकल्प था ही नहीं.

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